कुरान - 45:28 सूरह अल-जासिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

28
وَتَرَىٰ كُلَّ أُمَّةٖ جَاثِيَةٗۚ كُلُّ أُمَّةٖ تُدۡعَىٰٓ إِلَىٰ كِتَٰبِهَا ٱلۡيَوۡمَ تُجۡزَوۡنَ مَا كُنتُمۡ تَعۡمَلُونَ

Transliteration: (Wa taraa kulla ummatin jaasiyah; kullu ummatin tud'aaa ilaa kitaabihaa al Yawma tujzawna maa kuntum ta'maloon)

और आप हर उम्मत को घुटनों के बल गिरी हुई [60] देखेंगे; हर उम्मत अपने नाम-ए-आमाल की तरफ़ बुलाई जाएगी; "आज तुम्हें तुम्हारे किए का बदला [61] दिया जाएगा"। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-जासिया आयत 28 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-जासिया तफ़सीर - आयत 28

"और आप हर उम्मत को घुटनों के बल गिरी हुई [60] देखेंगे; हर उम्मत अपने नाम-ए-आमाल की तरफ़ बुलाई जाएगी; 'आज तुम्हें तुम्हारे किए का बदला [61] दिया जाएगा'।"

[60] घुटनों के बल गिरना (जासिया)

क़ियामत के दिन की शिद्दत, हैबत और इलाही जलाल के सामने तमाम क़ौमें और उम्मतें घुटनों के बल गिर पड़ेंगी। इसी लफ़्ज़ ‘जासिया’ (घुटनों के बल बैठने वाली) की मुनासबत से इस सूरह का नाम सूरह अल-जासिया रखा गया है। यह मंज़र अल्लाह की अदालत में मख़लूक़ की आजिज़ी और बेबसी को बयान करता है।

[61] नाम-ए-आमाल और इंसाफ़

हर गिरोह को उसका आमालनामा दिखाया जाएगा और मुकम्मल इंसाफ़ के साथ फ़ैसला किया जाएगा कि जो जैसा करके आया है, आज वैसा ही पाएगा।

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