Transliteration: (Fa ammal lazeena aamaanoo wa 'amilus saalihaati fayudkhiluhum Rabbuhum fee rahmatih; zaalika huwal fawzul mubeen)
"तो जो लोग ईमान लाए और जिन्होंने नेक आमाल किए [64], उनका रब उन्हें अपनी रहमत [65] में दाख़िल फ़रमाएगा; यही खुली कामयाबी [66] है।"
यह आयत सिखाती है कि असल बुनियाद ईमान है, जिसके बाद नेक आमाल का दर्जा आता है। मोमिन के नेक आमाल अगरचे थोड़े भी हों, लेकिन अगर वे इख़्लास और मुहब्बत के साथ किए जाएं तो अल्लाह की बारगाह में क़बूल होते हैं।
कोई शख़्स महज़ अपने आमाल के बलबूते पर जन्नत में दाख़िल नहीं हो सकता जब तक कि अल्लाह तआला का फ़ज़्ल व रहमत शामिल-ए-हाल न हो।
दुनियावी कामयाबी फ़ानी और आरज़ी है, जबकि जन्नत में दाख़िला और अल्लाह की रज़ा पा लेना ही हक़ीक़ी, दायमी और खुली कामयाबी (फ़ौज़ुल मुबीन) है।
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