कुरान - 45:31 सूरह अल-जासिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

31
وَأَمَّا ٱلَّذِينَ كَفَرُوٓاْ أَفَلَمۡ تَكُنۡ ءَايَٰتِي تُتۡلَىٰ عَلَيۡكُمۡ فَٱسۡتَكۡبَرۡتُمۡ وَكُنتُمۡ قَوۡمٗا مُّجۡرِمِينَ

Transliteration: (Wa ammal lazeena kafarooo afalam takun Aayaatee tutlaa 'alaikum fastakbartum wa kuntum qawmam mujrimeen)

और रहे वे जिन्होंने कुफ़्र किया, (उनसे कहा जाएगा): "क्या मेरी आयतें तुम्हें पढ़कर नहीं सुनाई जाती थीं? लेकिन तुमने तकब्बुर किया [67] और तुम मुजरिम लोग थे"। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-जासिया आयत 31 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-जासिया तफ़सीर - आयत 31

"और रहे वे जिन्होंने कुफ़्र किया, (उनसे कहा जाएगा): 'क्या मेरी आयतें तुम्हें पढ़कर नहीं सुनाई जाती थीं? लेकिन तुमने तकब्बुर किया [67] और तुम मुजरिम लोग थे'।"

[67] पैग़ाम पहुँचने के बावजूद तकब्बुर

यह डांट-डपट उन काफ़िरों के लिए होगी जिनके पास हुज़ूर अकरम ﷺ के ज़रिए अल्लाह की आयतें पहुँचीं मगर उन्होंने तकब्बुर से उन्हें ठुकरा दिया।

जो लोग हुज़ूर ﷺ की बेअसत से पहले गुज़र गए और मुवह्हिद (तौहीद परस्त) रहे, वे नजात पा सकते हैं। नाबालिग़ बच्चे और मजनून हिसाब-किताब के मुकल्लफ़ नहीं हैं। लेकिन जो दावत पहुँचने के बाद भी कुफ़्र पर डटे रहे, वे जहन्नम के हक़दार हैं।

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