Transliteration: (Wa ammal lazeena kafarooo afalam takun Aayaatee tutlaa 'alaikum fastakbartum wa kuntum qawmam mujrimeen)
"और रहे वे जिन्होंने कुफ़्र किया, (उनसे कहा जाएगा): 'क्या मेरी आयतें तुम्हें पढ़कर नहीं सुनाई जाती थीं? लेकिन तुमने तकब्बुर किया [67] और तुम मुजरिम लोग थे'।"
यह डांट-डपट उन काफ़िरों के लिए होगी जिनके पास हुज़ूर अकरम ﷺ के ज़रिए अल्लाह की आयतें पहुँचीं मगर उन्होंने तकब्बुर से उन्हें ठुकरा दिया।
जो लोग हुज़ूर ﷺ की बेअसत से पहले गुज़र गए और मुवह्हिद (तौहीद परस्त) रहे, वे नजात पा सकते हैं। नाबालिग़ बच्चे और मजनून हिसाब-किताब के मुकल्लफ़ नहीं हैं। लेकिन जो दावत पहुँचने के बाद भी कुफ़्र पर डटे रहे, वे जहन्नम के हक़दार हैं।
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