कुरान - 45:33 सूरह अल-जासिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

33
وَبَدَا لَهُمۡ سَيِّـَٔاتُ مَا عَمِلُواْ وَحَاقَ بِهِم مَّا كَانُواْ بِهِۦ يَسۡتَهۡزِءُونَ

Transliteration: (Wa badaa lahum saiyiaatu maa 'amiloo wa haaqa bihim maa kaanoo bihee yastahzi'oon)

और उनके बुरे आमाल की ख़राबियाँ उन पर ज़ाहिर (71) हो जाएंगी, और उन्हें वही अज़ाब आ घेरेगा जिसका वे मज़ाक़ उड़ाया करते थे (72)। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-जासिया आयत 33 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-जासिया तफ़सीर - आयत 33

"और उनके बुरे आमाल की ख़राबियाँ उन पर ज़ाहिर [71] हो जाएंगी, और उन्हें वही अज़ाब आ घेरेगा जिसका वे मज़ाक़ उड़ाया करते थे [72]।"

[71] बदआमालियों की रुसवाई

उनके बुरे आमाल निहायत भयानक और डरावनी शक्लों में उनके सामने आ खड़े होंगे जिनसे वे ख़ौफ़ खाकर भागेंगे। या उनके गुनाहों और कुफ़्र का जो अज़ाब दुनिया में छुपा हुआ था, वह पूरी तरह ज़ाहिर होकर उन पर टूट पड़ेगा।

[72] मज़ाक़ उड़ाए जाने वाले अज़ाब का घेराव

तफ़सीर रूहुल बयान के मुताबिक़ यहाँ ज़ाहिर होने से मुराद अज़ाब है। वह अज़ाब उन्हें चारों तरफ़ से इस तरह घेर लेगा कि भागने का कोई रास्ता न रहेगा—यानी वही अज़ाब जिसे वे दुनिया में मज़ाक़ समझते थे।

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