Transliteration: (Zaalikum bi annakumut takhaztum aayaatil laahi huzuwanw wa gharratkumul hayaatud dunyaa; fal yawma laa yukhrajoona minhaa wa laahum yusta'taboon)
"यह इसलिए कि तुमने अल्लाह की आयतों को मज़ाक़ बना लिया था [76], और तुम्हें दुनिया की ज़िंदगी ने धोखे में डाल दिया था [77]। तो आज के दिन न वे इससे (आग से) निकाले जाएंगे और न ही उनसे कोई रज़ामंदी [78] तलब की जाएगी।"
अल्लाह की आयतों, नबी के मोजिज़ात और शरीअत के अहकाम का मज़ाक़ उड़ाना सरासर कुफ़्र है। जो लोग दीन का इस्तेहज़ा (मज़ाक़) करते हैं, उनका ठिकाना हमेशा की आग है।
वे दुनिया की आरज़ी लज़्ज़तों में इस तरह खो गए कि आख़िरत को भूल गए। दौलत का हाथ में होना बुरा नहीं, लेकिन दुनिया की मुहब्बत का दिल में घर कर जाना इंसान को डुबो देता है—जैसे कश्ती के नीचे पानी हो तो वह तैरती है, मगर पानी कश्ती के अंदर आ जाए तो वह डूब जाती है।
उस दिन काफ़िरों को दोज़ख़ से निकलने का कोई रास्ता नहीं मिलेगा और न उनसे तौबा या अल्लाह को राज़ी करने का कोई उज़्र क़बूल किया जाएगा।
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