कुरान - 45:34 सूरह अल-जासिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

34
وَقِيلَ ٱلۡيَوۡمَ نَنسَىٰكُمۡ كَمَا نَسِيتُمۡ لِقَآءَ يَوۡمِكُمۡ هَٰذَا وَمَأۡوَىٰكُمُ ٱلنَّارُ وَمَا لَكُم مِّن نَّـٰصِرِينَ

Transliteration: (Wa qeelal yawma nansaakum kamaa naseetum liqaaa'a yawmikum haazaa wa maawaakumun Naaru wa maa lakum min naasireen)

और उनसे कहा जाएगा: "आज हम तुम्हें भुलाए देते हैं [73] जैसा कि तुमने अपने इस दिन की मुलाक़ात को भुला दिया था [74], और तुम्हारा ठिकाना आग है, और तुम्हारा कोई मददगार नहीं (75)"। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-जासिया आयत 34 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-जासिया तफ़सीर - आयत 34

"और उनसे कहा जाएगा: 'आज हम तुम्हें भुलाए देते हैं [73] जैसा कि तुमने अपने इस दिन की मुलाक़ात को भुला दिया था [74], और तुम्हारा ठिकाना आग है, और तुम्हारा कोई मददगार नहीं [75]'।"

[73] अज़ाब में हमेशा छोड़ दिया जाना

अल्लाह तआला भूलने से पाक और मुनज़्ज़ह है। “हम तुम्हें भुलाए देते हैं” का मतलब यह है कि हम तुम्हें हमेशा के लिए दोज़ख़ के अज़ाब में बे-यारो-मददगार छोड़ देंगे, जिस तरह तुमने आख़िरत को भुला रखा था।

[74] जान-बूझकर ग़फ़लत की सज़ा

यहाँ भूलने से मुराद काफ़िरों का जान-बूझकर क़ियामत का इनकार करना और उससे बे-रुख़ी बरतना है, कोई भूल-चूक नहीं।

[75] काफ़िरों के लिए शफ़ाअत की मनाही

क़ियामत के दिन काफ़िरों के लिए कोई सिफ़ारिशी या मददगार नहीं होगा। इसके बरअक्स, गुनहगार मोमिनीन को हुज़ूर ﷺ और औलिया-ए-किराम की शफ़ाअत से दोज़ख़ से नजात अता फ़रमाई जाएगी।

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