कुरान - 45:27 सूरह अल-जासिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

27
وَلِلَّهِ مُلۡكُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۚ وَيَوۡمَ تَقُومُ ٱلسَّاعَةُ يَوۡمَئِذٖ يَخۡسَرُ ٱلۡمُبۡطِلُونَ

Transliteration: (Wa lillaahi mulkus samaawaati wal ard; wa Yawma taqoomus Saa'atu Yawma 'iziny yakhsarul mubtiloon)

और अल्लाह ही के लिए है आसमानों और ज़मीन की बादशाही; और जिस दिन क़ियामत क़ायम होगी, उस दिन बातिल वाले सख़्त ख़सारे [59] में रहेंगे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-जासिया आयत 27 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-जासिया तफ़सीर - आयत 27

"और अल्लाह ही के लिए है आसमानों और ज़मीन की बादशाही; और जिस दिन क़ियामत क़ायम होगी, उस दिन बातिल वाले सख़्त ख़सारे [59] में रहेंगे।"

[59] मुनकिरीन का कामिल नुक़सान और ख़सारा

अगरचे काफ़िर दुनिया में भी घाटे में हैं, लेकिन उनकी मुकम्मल तबाही और ख़सारा क़ियामत के दिन पूरी तरह ज़ाहिर होगा। उस दिन सब देख लेंगे कि जिन्होंने अल्लाह, रसूल और क़ियामत को झुटलाया, वे किस क़दर नाकाम और बर्बाद हुए। आसमान और ज़मीन की मुतलक़ बादशाही सिर्फ़ अल्लाह ही की है।

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