कुरान - 18:21 सूरह अल-कह्फ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

21
وَكَذَٰلِكَ أَعۡثَرۡنَا عَلَيۡهِمۡ لِيَعۡلَمُوٓاْ أَنَّ وَعۡدَ ٱللَّهِ حَقّٞ وَأَنَّ ٱلسَّاعَةَ لَا رَيۡبَ فِيهَآ إِذۡ يَتَنَٰزَعُونَ بَيۡنَهُمۡ أَمۡرَهُمۡۖ فَقَالُواْ ٱبۡنُواْ عَلَيۡهِم بُنۡيَٰنٗاۖ رَّبُّهُمۡ أَعۡلَمُ بِهِمۡۚ قَالَ ٱلَّذِينَ غَلَبُواْ عَلَىٰٓ أَمۡرِهِمۡ لَنَتَّخِذَنَّ عَلَيۡهِم مَّسۡجِدٗا

Transliteration: (Wa kazaalika a'sarnaa 'alaihim liya'lamooo anna wa'dal laahi haqqunw wa annas Saa'ata laa raiba feehaa iz yatanaaza'oona bainahum amrahum faqaalub noo 'alaihim bunyaanaa; Rabbuhum a'lamu bihim; qaalal lazeena ghalaboo 'alaaa amrihim lanat takhizanna 'alaihim masjidaa)

और इसी तरह हमने लोगों को उन (के हाल) पर मुत्तला कर दिया ताकि वे जान लें कि अल्लाह का वादा सच्चा है और यह कि क़ियामत (के आने) में कोई शक नहीं। जब वे आपस में उनके मुआमले में झगड़ रहे थे, तो उन्होंने कहा, 'उन पर एक इमारत बना दो; उनका रब उनके हाल को ख़ूब जानता है।' उन लोगों ने जिनकी राय ग़ालिब रही कहा, 'हम तो ज़रूर उनके ऊपर एक मस्जिद (इबादतगाह) बनाएंगे।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कह्फ़ आयत 21 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-कहफ़ - आयत 21

✅ राज़ का फ़ाश होना: दोबारा ज़िन्दगी की खुली दलील

जब वह नौजवान सिक्का लेकर बाज़ार पहुंचा, तो सदियों पुराना सिक्का देखकर सब हैरान रह गए। उस वक़्त शहर का बादशाह और अवाम मोमिन हो चुके थे मगर उनमें मरने के बाद दोबारा ज़िन्दा होने के बारे में इख़्तिलाफ़ था। अस्हाबे कहफ़ के इस वाक़िआ ने मुकम्मल साबित कर दिया कि अल्लाह मुर्दों को ठीक इसी तरह दोबारा ज़िन्दा करने पर क़ादिर है। बाद में लोगों ने उनकी यादगार और बरकत के लिए उस जगह मस्जिद तामीर की।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now