कुरान - 18:22 सूरह अल-कह्फ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

22
سَيَقُولُونَ ثَلَٰثَةٞ رَّابِعُهُمۡ كَلۡبُهُمۡ وَيَقُولُونَ خَمۡسَةٞ سَادِسُهُمۡ كَلۡبُهُمۡ رَجۡمَۢا بِٱلۡغَيۡبِۖ وَيَقُولُونَ سَبۡعَةٞ وَثَامِنُهُمۡ كَلۡبُهُمۡۚ قُل رَّبِّيٓ أَعۡلَمُ بِعِدَّتِهِم مَّا يَعۡلَمُهُمۡ إِلَّا قَلِيلٞۗ فَلَا تُمَارِ فِيهِمۡ إِلَّا مِرَآءٗ ظَٰهِرٗا وَلَا تَسۡتَفۡتِ فِيهِم مِّنۡهُمۡ أَحَدٗا

Transliteration: (Sa yaqooloona salaasatur raabi'uhum kalbuhum wa yaqooloona khamsatun saadisuhum kalbuhum rajmam bilghaib; wa yaqooloona sab'atunw wa saaminuhum kalbuhum; qur Rabbeee a'lamu bi'iddatihim maa ya'lamuhum illaa qaleel; falaa tumaari feehim illaa miraaa'an zaahiranw wa laa tastafti feehim minhum ahadaa (section 3))

कुछ लोग कहेंगे कि 'वे तीन थे, चौथा उनका कुत्ता था'; और कुछ कहेंगे कि 'वे पाँच थे, छठा उनका कुत्ता था'—यह सब ग़ैब में तीर चलाने (अटकलपच्चू) की बातें हैं; और कुछ कहेंगे कि 'वे सात थे, और आठवां उनका कुत्ता था।' कह दीजिए कि 'मेरा रब उनकी तादाद को ख़ूब जानता है; उन्हें बहुत थोड़े लोगों के सिवा कोई नहीं जानता।' पस आप उनके बारे में सरसरी गुफ़्तगू के सिवा कोई बहस न कीजिए, और न उनमें से किसी से उनके बारे में कुछ पूछिए। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कह्फ़ आयत 22 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-कहफ़ - आयत 22

✅ अस्हाबे कहफ़ की तादाद और बेमक़सद बहसों से परहेज़

यहूदी और ईसाई अस्हाबे कहफ़ की सही तादाद पर बेजा बहसें करते थे। अल्लाह ने फ़रमाया कि असल मक़सद उनकी तादाद जानना नहीं बल्कि उनके ईमान, तवक्कुल और इस वाक़िआ से सबक़ हासिल करना है। उनका सही इल्म अल्लाह के पास है। इसलिए ग़ैर-ज़रूरी तफ़सीलात में उलझने और बहसबाज़ी से मना फ़रमाया गया।

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