कुरान - 18:24 सूरह अल-कह्फ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

24
إِلَّآ أَن يَشَآءَ ٱللَّهُۚ وَٱذۡكُر رَّبَّكَ إِذَا نَسِيتَ وَقُلۡ عَسَىٰٓ أَن يَهۡدِيَنِ رَبِّي لِأَقۡرَبَ مِنۡ هَٰذَا رَشَدٗا

Transliteration: (Illaaa any yashaaa'al laah; wazkur Rabbaka izaa naseeta wa qul 'asaaa any yahdiyani Rabbee li aqraba min haazaa rashadaa)

मगर यह कि (साथ में कहिए) 'अगर अल्लाह चाहे' (इंशा-अल्लाह); और जब आप भूल जाएं तो अपने रब को याद कीजिए और कहिए कि 'उम्मीद है कि मेरा रब मुझे इससे भी ज़्यादा हिदायत के क़रीब रास्ते की रहनुमाई फ़रमाएगा।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कह्फ़ आयत 24 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-कहफ़ - आयत 24

✅ 'इंशा-अल्लाह' की अहमियत और भूलने पर ज़िक्र-ए-इलाही

इंसान का कोई भी इरादा अल्लाह की मर्जी के बगैर पूरा नहीं हो सकता। इसलिए हर मुस्तक़बिल के काम के साथ 'इंशा-अल्लाह' (अगर अल्लाह ने चाहा) कहना लाज़िम है। अगर कभी भूल जाए तो जैसे ही याद आए, फ़ौरन अल्लाह का ज़िक्र करे और अपनी हिदायत व रहनुमाई के लिए अल्लाह से दुआ करे।

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