कुरान - 18:26 सूरह अल-कह्फ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

26
قُلِ ٱللَّهُ أَعۡلَمُ بِمَا لَبِثُواْۖ لَهُۥ غَيۡبُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۖ أَبۡصِرۡ بِهِۦ وَأَسۡمِعۡۚ مَا لَهُم مِّن دُونِهِۦ مِن وَلِيّٖ وَلَا يُشۡرِكُ فِي حُكۡمِهِۦٓ أَحَدٗا

Transliteration: (Qulil laahu a'lamu bimaa labisoo lahoo ghaibus samaawaati wal ardi absir bihee wa asmi'; maa lahum min doonihee minw waliyyinw wa laa yushriku fee hukmihee ahadaa)

कह दीजिए कि 'अल्लाह ही बेहतर जानता है कि वे कितनी मुद्दत रहे; आसमानों और ज़मीन का ग़ैब उसी के इल्म में है। क्या ही ख़ूब देखने वाला और क्या ही ख़ूब सुनने वाला है वह! उसके सिवा उनका कोई मददगार नहीं, और न वह अपनी हुकूमत (अख़्तियार) में किसी को साझीदार बनाता है।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कह्फ़ आयत 26 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-कहफ़ - आयत 26

✅ ग़ैब का मुकम्मल इल्म और अल्लाह की यकताई

अल्लाह तआला ही कायनात के तमाम पोशीदा राज़ों का आलिम है। उसकी समाअत और बसीरत मुकम्मल है, कोई चीज़ उससे ओझल नहीं। कायनात की तदबीर और हुकूमत में उसका कोई साझीदार नहीं, वही तन्हा हर मुआमले का फ़ैसला फ़रमाने वाला है।

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