कुरान - 18:27 सूरह अल-कह्फ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

27
وَٱتۡلُ مَآ أُوحِيَ إِلَيۡكَ مِن كِتَابِ رَبِّكَۖ لَا مُبَدِّلَ لِكَلِمَٰتِهِۦ وَلَن تَجِدَ مِن دُونِهِۦ مُلۡتَحَدٗا

Transliteration: (Watlu maaa oohiya ilaika min Kitaabi Rabbika laa mubaddila li Kalimaatihee wa lan tajida min doonihee multahadaa)

और अपने रब की किताब में से जो कुछ आपकी तरफ़ वह्य किया गया है उसकी तिलावत कीजिए; कोई उसके कलिमात (अहकाम) को बदलने वाला नहीं है, और आप उसके सिवा कोई पनाहगाह हरगिज़ न पाएंगे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कह्फ़ आयत 27 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-कहफ़ - आयत 27

✅ तिलावत-ए-क़ुरआन और कलिमात-ए-इलाही की हिफ़ाज़त

नबी करीम (ﷺ) और अहले ईमान को हुक्म दिया गया कि अल्लाह की नाज़िल की हुई किताब की पाबंदी से तिलावत करें और उसके अहकाम पर अमल करें। अल्लाह का कलाम अटल और महफ़ूज़ है, दुनिया की कोई ताक़त इसमें रद्दो-बदल नहीं कर सकती, और अल्लाह के सिवा कोई सच्ची पनाहगाह नहीं है।

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