कुरान - 18:29 सूरह अल-कह्फ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

29
وَقُلِ ٱلۡحَقُّ مِن رَّبِّكُمۡۖ فَمَن شَآءَ فَلۡيُؤۡمِن وَمَن شَآءَ فَلۡيَكۡفُرۡۚ إِنَّآ أَعۡتَدۡنَا لِلظَّـٰلِمِينَ نَارًا أَحَاطَ بِهِمۡ سُرَادِقُهَاۚ وَإِن يَسۡتَغِيثُواْ يُغَاثُواْ بِمَآءٖ كَٱلۡمُهۡلِ يَشۡوِي ٱلۡوُجُوهَۚ بِئۡسَ ٱلشَّرَابُ وَسَآءَتۡ مُرۡتَفَقًا

Transliteration: (Wa qulil haqqu mir Rabbikum faman shaaa'a falyu'minw wa man shaaa'a falyakfur; innaaa a'tadnaa lizzaalimeena Naaran ahaata bihim suraadiquhaa; wa iny yastagheesoo yughaasoo bimaaa'in kalmuhli yashwil wujooh' bi'sash-sharaab; wa saaa'at murtafaqaa)

और कह दीजिए कि 'हक़ तुम्हारे रब की तरफ़ से है; पस जो चाहे ईमान ले आए और जो चाहे कुफ़्र करे।' बेशक हमने ज़ालिमों के लिए ऐसी आग तैयार कर रखी है जिसकी कनातें (दीवारें) उन्हें घेर लेंगी; और अगर वे फ़रियाद करेंगे तो उनकी फ़रियाद ऐसे पानी से की जाएगी जो पिघले हुए तांबे की तरह होगा जो चेहरों को भून डालेगा; कितना बुरा पीने का पानी है और कितनी बुरी आरामगाह है! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कह्फ़ आयत 29 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-कहफ़ - आयत 29

✅ हक़ का साफ़ पैग़ाम और जहन्नम की दहकती आग

अल्लाह ने इंसान को अक़्ल और इख़्तियार दिया है: जो चाहे हक़ को क़ुबूल करके मोमिन बने और जो चाहे इनकार करके काफ़िर बने, लेकिन दोनों का अंजाम सामने है। ज़ालिमों के लिए जहन्नम की आग का घेराव होगा जहाँ प्यास से तड़पने पर खौलता हुआ पीप व तांबे जैसा पानी दिया जाएगा जो मुंह के क़रीब आते ही चेहरे की खाल उधेड़ देगा।

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