कुरान - 18:28 सूरह अल-कह्फ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

28
وَٱصۡبِرۡ نَفۡسَكَ مَعَ ٱلَّذِينَ يَدۡعُونَ رَبَّهُم بِٱلۡغَدَوٰةِ وَٱلۡعَشِيِّ يُرِيدُونَ وَجۡهَهُۥۖ وَلَا تَعۡدُ عَيۡنَاكَ عَنۡهُمۡ تُرِيدُ زِينَةَ ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَاۖ وَلَا تُطِعۡ مَنۡ أَغۡفَلۡنَا قَلۡبَهُۥ عَن ذِكۡرِنَا وَٱتَّبَعَ هَوَىٰهُ وَكَانَ أَمۡرُهُۥ فُرُطٗا

Transliteration: (Wasbir nafsaka ma'al lazeena yad'oona Rabbahum bilghadaati wal'ashiyyi yureedoona Wajhahoo wa laa ta'du 'aynaaka 'anhum tureedu zeenatal hayaatid dunyaa wa laa tuti' man aghfalnaa qalbahoo 'an zikrinaa wattaba'a hawaahu wa kaana amruhoo furutaa)

और अपने आप को उन लोगों के साथ रोके रखिए जो सुबह व शाम अपने रब को पुकारते हैं और उसकी रज़ा चाहते हैं; और आप अपनी आंखें उनसे न फेरिए कि दुनियावी ज़िन्दगी की ज़ीनत तलाश करने लगें, और उस शख़्स का कहना न मानिए जिसके दिल को हमने अपने ज़िक्र से ग़ाफ़िल कर दिया है और जिसने अपनी ख्वाहिश की पैरवी की और उसका मामला हद से गुज़र चुका है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कह्फ़ आयत 28 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-कहफ़ - आयत 28

✅ ग़रीब मुख़लिस मोमिनों की सोहबत और ग़ाफ़िलों से दूरी

मक्का के मुतकब्बिर सरदारों ने शर्त रखी थी कि आप हज़रत बिलाल, सुहैब और अम्मार (रज़ियल्लाहु अन्हुम) जैसे ग़रीब व नादार सहाबा को अपनी महफ़िल से हटा दें तो हम आपकी बात सुनेंगे। अल्लाह ने सख़्ती से मना फ़रमाया कि सच्चे, मुख़लिस और अल्लाह की रज़ा चाहने वाले बन्दों की सोहबत इख़्तियार रखिए, और दुनियापरस्त व ग़ाफ़िल सरदारों की ख्वाहिशात की पैरवी हरगिज़ न कीजिए।

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