कुरान - 18:30 सूरह अल-कह्फ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

30
إِنَّ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّـٰلِحَٰتِ إِنَّا لَا نُضِيعُ أَجۡرَ مَنۡ أَحۡسَنَ عَمَلًا

Transliteration: (Innal lazeena aamanoo wa 'amilus saalihaati innaa laa nudee'u ajra man ahsana 'amalaa)

बेशक जो लोग ईमान लाए और उन्होंने नेक आमाल किए, तो यक़ीनन हम किसी ऐसे शख़्स का अज्र ज़ाया नहीं करते जिसने अच्छा अमल किया हो। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कह्फ़ आयत 30 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-कहफ़ - आयत 30

✅ नेककारों के अज्र की ज़मानत

इसके बरअक्स जो लोग अल्लाह पर सच्चा ईमान लाए और उन्होंने नेक आमाल किए, अल्लाह उनके किसी भी छोटे या बड़े अमल को ज़ाया नहीं फ़रमाएगा। हर नेक अमल की भरपूर क़द्र होगी और अल्लाह की बारगाह से आला तरीन जन्नतें और इज़्ज़तें अता की जाएंगी।

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