Transliteration: (Wa laa taqoolanna lishai'in innee faa'ilun zaalika ghadaa)
जब कुफ़्फ़ार ने नबी करीम (ﷺ) से अस्हाबे कहफ़, ज़ुलक़रनैन और रूह के बारे में पूछा था, तो आप (ﷺ) ने फ़रमाया था कि मैं कल जवाब दूंगा, लेकिन 'इंशा-अल्लाह' कहना भूल गए थे, जिस पर चन्द दिन वह्य रुक गई। इस पर अल्लाह ने तालीमी अंदाज़ में यह हुक्म नाज़िल फ़रमाया।
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