Transliteration: (Wa minal lazeena qaalooo innaa nasaaraaa akhaznaa meesaaqahum fanasoo hazzam mimmaa zukkiroo bihee fa aghrainaa bainahumul 'adaawata walbaghdaaa'a ilaa yawmil Qiyaamah; wa sawfa yunabbi'uhumul laahu bimaa kaanoo yasna'oon)
इस आयत में इशारा है कि आज के ज़माने के 'नसरानी' (ईसाई) सिर्फ़ नाम के नसरानी हैं, अमल और अकीदे से नहीं।
क्योंकि उन्होंने हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) की सच्ची तालीमात को छोड़ दिया, और जो वादा उनके साथ किया गया था — यानी तौहीद, नबूवत और शरीअत की पैरवी — उसे तोड़ दिया।
इसलिए, उनका दावा सिर्फ़ जुबानी है, हकीक़त नहीं।
इस आयत से यह भी समझ आता है कि नसरानी आपस में फ़िर्कों में बंट गए और एक-दूसरे से हमेशा दुश्मनी में उलझे रहे।
यह हालात आज भी देखे जा सकते हैं — जैसे यूरोप के मुल्कों (जर्मनी, इंग्लैंड वग़ैरह) में, मसीही फ़िर्के आपस में अलग-अलग हैं, और उनमें अंदरूनी मतभेद और टकराव लगातार जारी रहते हैं।
यहाँ तक कि उनके क़ब्रिस्तानों में भी फ़र्क़ होता है — शहर और गांव के नसरानी अलग दफ़न किए जाते हैं।
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