कुरान - 5:47 सूरह अल-मायदा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

47
وَلۡيَحۡكُمۡ أَهۡلُ ٱلۡإِنجِيلِ بِمَآ أَنزَلَ ٱللَّهُ فِيهِۚ وَمَن لَّمۡ يَحۡكُم بِمَآ أَنزَلَ ٱللَّهُ فَأُوْلَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلۡفَٰسِقُونَ

Transliteration: (Walyahkum Ahlul Injeeli bimaaa anzalal laahu feeh; wa mal lam yahkum bimaaa anzalal laahu fa ulaaa'ika humul faasiqoon)

और चाहिए कि इंजील वाले उस पर फ़ैसला करें जो अल्लाह ने उसमें नाज़िल किया है [152]। और जो लोग फ़ैसला नहीं करते उस चीज़ के मुताबिक़ जो अल्लाह ने नाज़िल की है, तो वही लोग हैं जो हद से बढ़ने वाले हैं [153]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मायदा आयत 47 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-माइदा – आयत 47 की तफ़्सीर

 

✅ [152] इंजील के अनुसार फ़ैसला करना

इंजील वाले उस पर फ़ैसला करें जो अल्लाह ने उसमें नाज़िल किया है — यह हुक्म इस बात की तस्दीक़ करता है कि हर उम्मत को अपने नाज़िलशुदा हुक्मों के अनुसार चलना चाहिए। इंजील में जो इलाही क़ानून था, उसका पालन जरूरी था, हालाँकि अब वह क़ानून क़ुरआन के द्वारा रद्द हो चुका है। आज भी इंजील की कुछ शिक्षाएं मौजूद हो सकती हैं, लेकिन शरीअत का आख़िरी और मुकम्मल ज़रिया अब क़ुरआन है।

✅ [153] इलाही हुक्म को न मानना सरकशी है

जो लोग फ़ैसला नहीं करते उस चीज़ के मुताबिक़ जो अल्लाह ने नाज़िल की है, वे हद से बढ़ने वाले (फ़ासिक़) हैं। यह उन लोगों के लिए है जो इलाही हुक्मों को जानबूझकर छोड़ते हैं। ऐसे लोग अल्लाह के नज़दीक गुनाहगार और सरकश माने जाते हैं।

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