कुरान - 23:101 सूरह अल-मुमिनून अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

101
فَإِذَا نُفِخَ فِي ٱلصُّورِ فَلَآ أَنسَابَ بَيۡنَهُمۡ يَوۡمَئِذٖ وَلَا يَتَسَآءَلُونَ

Transliteration: (Fa izaa nufikha fis Soori falaaa ansaaba bainahum yawma'izinw wa laa yatasaaa'aloon)

फिर जब सूर फूंका जाएगा, तो उस दिन न तो उनके दरमियान कोई ख़ानदानी रिश्ते-नाते रहेंगे [140] और न ही वे एक-दूसरे का हाल पूछेंगे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मुमिनून आयत 101 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-मोमिनून – आयत 101

"फिर जब सूर फूंका जाएगा, तो उस दिन न तो उनके दरमियान कोई रिश्ते-नाते रहेंगे [140] और न ही वे एक-दूसरे का हाल पूछेंगे।"

[140] क़ियामत के दिन दुनियावी रिश्तों का ख़ात्मा

सूर फूंके जाने के वक़्त क़ियामत की दहश्त और हौलनाकी ऐसी होगी कि दुनियावी नसब और रिश्ते-नाते टूट जाएंगे। हर शख़्स को अपनी नफ़्स-नफ़्सी पड़ी होगी और कोई किसी का पुरसाने-हाल न होगा।

अलबत्ता हदीस-ए-पाक में वाज़ेह है कि हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ का नसब और सबब क़ियामत के दिन भी बाक़ी रहेगा। नेक औलाद, मुत्तक़ी वालिदैन और अहले-ईमान के रूहानी रिश्ते बरक़रार रहेंगे और अल्लाह के हुक्म से नेक लोग अपने प्यारों की शफ़ाअत करेंगे। कुरआन में फ़रमाया: 'अख़िल्ला (दोस्त) उस दिन एक-दूसरे के दुश्मन होंगे सिवाय परहेज़गारों के'।

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