कुरान - 23:103 सूरह अल-मुमिनून अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

103
وَمَنۡ خَفَّتۡ مَوَٰزِينُهُۥ فَأُوْلَـٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ خَسِرُوٓاْ أَنفُسَهُمۡ فِي جَهَنَّمَ خَٰلِدُونَ

Transliteration: (Wa man khaffat mawaa zeenuhoo fa ulaaa'ikal lazeena khasiroo 'anfusahum fee Jahannama khaalidoon)

और जिनके पलड़े [142] हल्के होंगे, तो यही वे लोग हैं जिन्होंने अपनी जानों को घाटे में डाल दिया; वे हमेशा [143] जहन्नम में रहने वाले हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मुमिनून आयत 103 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-मोमिनून – आयत 103

"और जिनके पलड़े [142] हल्के होंगे, तो यही वे लोग हैं जिन्होंने अपनी जानों को घाटे में डाल दिया; वे हमेशा [143] जहन्नम में रहने वाले हैं।"

[142] हल्के पलड़े और ईमान के बग़ैर आमाल की बेवक़अती

यह उन काफ़िरों और बदबख़्तों का ज़िक्र है जिनके पलड़े हल्के होंगे, क्योंकि उनके पास ईमान की दौलत न थी। ईमान के बग़ैर दुनियावी भले काम भी आख़िरत के तराज़ू में कोई वज़न नहीं रखते और राख की तरह उड़ जाते हैं।

[143] दायमी घाटा और दोज़ख़ का हमेशा का अज़ाब

इन्होंने अपनी जानों को दायमी ख़सारे (घाटे) में डाल दिया और उनका ठिकाना हमेशा-हमेशा के लिए जहन्नम की भड़कती हुई आग होगा, जिससे उन्हें कभी रिहाई नहीं मिलेगी।

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