कुरान - 23:105 सूरह अल-मुमिनून अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

105
أَلَمۡ تَكُنۡ ءَايَٰتِي تُتۡلَىٰ عَلَيۡكُمۡ فَكُنتُم بِهَا تُكَذِّبُونَ

Transliteration: (Alam takun Aayaatee tutlaa 'alaikum fakuntum bihaa tukazziboon)

(उनसे फ़रमाया जाएगा,) 'क्या मेरी आयतें तुम्हें पढ़कर नहीं सुनाई जाती थीं, तो तुम उन्हें झुठलाया करते थे [145]?' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मुमिनून आयत 105 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-मोमिनून – आयत 105

"क्या मेरी आयतें तुम्हें पढ़कर नहीं सुनाई जाती थीं, तो तुम उन्हें झुठलाया करते थे [145]?"

[145] वाज़ेह अहकाम के बावजूद झुठलाना

यह दोज़ख़ियों को मलामत और सरज़निश के तौर पर फ़रमाया जाएगा कि क्या तुम्हारे पास पैग़म्बर नहीं आए थे? क्या तुम्हें अल्लाह की आयतें पढ़कर नहीं सुनाई गई थीं? उनका कुफ़्र किसी बे-ख़बरी की वजह से न था, बल्कि जान-बूझकर हक़ को झुठलाने और तकब्बुर करने का नतीजा था।

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