Transliteration: (Alam takun Aayaatee tutlaa 'alaikum fakuntum bihaa tukazziboon)
"क्या मेरी आयतें तुम्हें पढ़कर नहीं सुनाई जाती थीं, तो तुम उन्हें झुठलाया करते थे [145]?"
यह दोज़ख़ियों को मलामत और सरज़निश के तौर पर फ़रमाया जाएगा कि क्या तुम्हारे पास पैग़म्बर नहीं आए थे? क्या तुम्हें अल्लाह की आयतें पढ़कर नहीं सुनाई गई थीं? उनका कुफ़्र किसी बे-ख़बरी की वजह से न था, बल्कि जान-बूझकर हक़ को झुठलाने और तकब्बुर करने का नतीजा था।
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