कुरान - 23:107 सूरह अल-मुमिनून अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

107
رَبَّنَآ أَخۡرِجۡنَا مِنۡهَا فَإِنۡ عُدۡنَا فَإِنَّا ظَٰلِمُونَ

Transliteration: (Rabbanaa akhrijnaa minhaa fa in 'udnaa fa innaa zaalimoon)

ऐ हमारे रब! हमें इस (दोज़ख़) से निकाल दे, फिर अगर हम दोबारा ऐसा करें तो बेशक हम ही ज़ालिम होंगे [146]!' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मुमिनून आयत 107 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-मोमिनून – आयत 107

"ऐ हमारे रब! हमें इस से निकाल दे, फिर अगर हम दोबारा ऐसा करें तो बेशक हम ही ज़ालिम होंगे [146]!"

[146] दोज़ख़ से निकलने की लाचारगी भरी फ़रियाद

दोज़ख़ी मुद्दतों तक अज़ाब सहने के बाद चीख़-पुकार करेंगे कि ऐ अल्लाह! हमें एक बार दोज़ख़ से निकाल कर दुनिया में भेज दे, अगर हम फिर वही कुफ़्र करें तो बेशक हम ज़ालिम होंगे। रिवायत में आता है कि वे मुद्दतों तक पुकारते रहेंगे लेकिन उनकी कोई फ़रियाद क़बूल नहीं होगी।

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