कुरान - 23:106 सूरह अल-मुमिनून अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

106
قَالُواْ رَبَّنَا غَلَبَتۡ عَلَيۡنَا شِقۡوَتُنَا وَكُنَّا قَوۡمٗا ضَآلِّينَ

Transliteration: (Qaaloo Rabbanaa ghalabat 'alainaa shiqwatunaa wa kunnaa qawman daaalleen)

वे अर्ज़ करेंगे, 'ऐ हमारे रब! हमारी बदबख़्ती हम पर ग़ालिब आ गई थी, और हम यक़ीनन भटके हुए लोग थे; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मुमिनून आयत 106 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-मोमिनून – आयत 106

"वे अर्ज़ करेंगे, 'ऐ हमारे रब! हमारी बदबख़्ती हम पर ग़ालिब आ गई थी, और हम यक़ीनन भटके हुए लोग थे'।"

बदबख़्ती और गुमराही का लाचारगी भरा इक़रार

क़ियामत के दिन मुनकिरीन अपनी नाकामी का बाज़ाब्ता इक़रार करेंगे। वे कहेंगे कि हमारी बदबख़्ती हम पर ग़ालिब आ गई और हम सीधे रास्ते से भटके रहे। यह कोई ख़ालिस तौबा नहीं होगी, बल्कि अज़ाब के ख़ौफ़ और बेबसी के आलम में किया गया बेफ़ायदा इज़हार होगा, क्योंकि उस वक़्त किसी उज़्र या पछतावे की कोई गुंजाइश बाक़ी नहीं रहेगी।

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