कुरान - 28:10 सूरह अल-क़सस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

10
وَأَصۡبَحَ فُؤَادُ أُمِّ مُوسَىٰ فَٰرِغًاۖ إِن كَادَتۡ لَتُبۡدِي بِهِۦ لَوۡلَآ أَن رَّبَطۡنَا عَلَىٰ قَلۡبِهَا لِتَكُونَ مِنَ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ

Transliteration: (Wa asbaha fu'aadu ummi Moosaa faarighan in kaadat latubdee bihee law laaa arrabatnaa 'alaa qalbihaa litakoona minal mu'mineen)

और मूसा की माँ का दिल (सब्र व क़रार से) ख़ाली (बे-ताब) हो गया [24]; क़रीब था कि वे इस राज़ को ज़ाहिर कर बैठतीं [25] अगर हम उनके दिल को ढाढ़स (मज़बूती) न देते [26] ताकि वे (अल्लाह के वादे पर) यक़ीन रखने वालों में रहें। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़सस आयत 10 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़सस तफ़सीर - आयत 10

"और मूसा की माँ का दिल (सब्र व क़रार से) ख़ाली (बे-ताब) हो गया [24]; क़रीब था कि वे इस राज़ को ज़ाहिर कर बैठतीं [25] अगर हम उनके दिल को ढाढ़स (मज़बूती) न देते [26] ताकि वे (अल्लाह के वादे पर) यक़ीन रखने वालों में रहें।"

[24] माँ के दिल की बे-क़रारी

जब हज़रत मूसा की वालिदा को मालूम हुआ कि संदूक़ फ़िरऔन के महल में पहुंच गया है, तो ममता के जोश और सदमे से उनका दिल तमाम दुनियावी ख़्यालात से ख़ाली होकर सिर्फ़ मूसा के ग़म में डूब गया।

[25] राज़ के ज़ाहिर होने का ख़तरा

बे-ताबी की वजह से क़रीब था कि वे चीख़ उठतीं और कह बैठतीं कि वह मेरा ही लाल है, जिससे सारा राज़ फ़ाश हो जाता और बच्चे की जान ख़तरे में पड़ जाती।

[26] दिल को इलाही तक़वियत और सब्र

अल्लाह तआला ने उनके दिल पर सब्र और सुकून नाज़िल फ़रमाया और उन्हें अपने वादे की याद दिलाकर मज़बूती बख़्शी ताकि वे अल्लाह के वादे पर मुकम्मल यक़ीन रखें।

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