कुरान - 28:2 सूरह अल-क़सस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

2
تِلۡكَ ءَايَٰتُ ٱلۡكِتَٰبِ ٱلۡمُبِينِ

Transliteration: (Tilka Aayaatul Kitaabil mubeen)

ये आयात हैं रौशन (स्पष्ट) किताब की [2]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़सस आयत 2 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़सस तफ़सीर - आयत 2

"ये आयात हैं रौशन (स्पष्ट) किताब की [2]।"

[2] रौशन व वाज़ेह किताब

क़ुरआन-ए-पाक को 'रौशन किताब' (किताबे मुबीन) फ़रमाया गया, क्योंकि इसकी आयात हक़ को बिल्कुल वाज़ेह और ज़ाहिर कर देती हैं, हक़ और बातिल के दरमियान फ़र्क़ वाज़ेह फ़रमाती हैं, और इंसानियत के लिए सीधा रास्ता पूरी रौशनी के साथ पेश करती हैं।

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