कुरान - 16:100 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

100
إِنَّمَا سُلۡطَٰنُهُۥ عَلَى ٱلَّذِينَ يَتَوَلَّوۡنَهُۥ وَٱلَّذِينَ هُم بِهِۦ مُشۡرِكُونَ

Transliteration: (Innnamaa sultaanuhoo 'alal lazeena yatawallawnahoo wallazeena hum bihee mushrikoon (section 13))

उसका क़ाबू तो उन्हीं पर है जो उससे दोस्ती रखते हैं [226] और जो उसके कहने से शिर्क करते हैं [227]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 100 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 100 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"उसका क़ाबू तो उन्हीं पर है जो उससे दोस्ती रखते हैं [226] और जो उसके कहने से शिर्क करते हैं [227]।"

[226] शैतान से दोस्ती का मफ़हूम

बुराई की तरफ़ मैलान रखना और बुरे लोगों से मोहब्बत करना ही हक़ीक़त में शैतान से दोस्ती गाँठना है, जो तमाम गुनाहों की जड़ है।

[227] अम्बिया व औलिया की इस्मत

अल्लाह के सच्चे बन्दे अम्बिया और औलिया गुनाहों से मासूम और महफ़ूज़ होते हैं; शैतान का उन पर कोई ज़ोर नहीं चलता। हज़रत आदम अलैहिस्सलाम से जो अम्र सरज़द हुआ वह इज्तिहादी ख़ता थी, कोई गुनाह नहीं था।

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