कुरान - 16:102 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

102
قُلۡ نَزَّلَهُۥ رُوحُ ٱلۡقُدُسِ مِن رَّبِّكَ بِٱلۡحَقِّ لِيُثَبِّتَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَهُدٗى وَبُشۡرَىٰ لِلۡمُسۡلِمِينَ

Transliteration: (Qul nazzalahoo Roohul Qudusi mir Rabbika bilhaqqi liyusabbital lazeena aamanoo wa hudanw wa bushraa lilmuslimeen)

फ़रमा दीजिए, "इसे 'रूह उल-क़ुदुस' (हज़रत जिब्रील) ने आपके रब की तरफ़ से हक़ के साथ उतारा है [232], ताकि ईमान वालों को साबित-क़दम रखे [233], और मुसलमानों के लिए हिदायत और बशारत हो [234]।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 102 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 102 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"फ़रमा दीजिए, 'इसे रूह उल-क़ुदुस ने आपके रब की तरफ़ से हक़ के साथ उतारा है [232], ताकि ईमान वालों को साबित-क़दम रखे [233], और मुसलमानों के लिए हिदायत और बशारत हो [234]।'"

[232] रूह उल-क़ुदुस (हज़रत जिब्रील) की अज़मत

'हक़ के साथ' यानी इसमें कोई रद्दोबदल नहीं। हज़रत जिब्रील अलैहिस्सलाम निहायत मुक़द्दस, पाक और मासूम फ़रिश्ते हैं, इसलिए उन्हें 'रूह उल-क़ुदुस' (पवित्र आत्मा) कहा गया है।

[233] मोमिनीन की साबित-क़दमी

क़ुरआन के अहकाम ईमान वालों के दिलों को तसल्ली देते हैं और नासिख़ व मंसूख़ की हिकमतों पर ग़ौर करके उनका ईमान और पुख़्ता हो जाता है।

[234] मुसलमानों के लिए हिदायत व ख़ुशख़बरी

क़ुरआन-ए-पाक एक ही है, मगर मोमिनों के लिए हिदायत व रहमत बनता है और हठधर्म काफ़िरों के लिए ख़सारा और गुमराही बढ़ाता है।

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