Transliteration: (Qul nazzalahoo Roohul Qudusi mir Rabbika bilhaqqi liyusabbital lazeena aamanoo wa hudanw wa bushraa lilmuslimeen)
"फ़रमा दीजिए, 'इसे रूह उल-क़ुदुस ने आपके रब की तरफ़ से हक़ के साथ उतारा है [232], ताकि ईमान वालों को साबित-क़दम रखे [233], और मुसलमानों के लिए हिदायत और बशारत हो [234]।'"
'हक़ के साथ' यानी इसमें कोई रद्दोबदल नहीं। हज़रत जिब्रील अलैहिस्सलाम निहायत मुक़द्दस, पाक और मासूम फ़रिश्ते हैं, इसलिए उन्हें 'रूह उल-क़ुदुस' (पवित्र आत्मा) कहा गया है।
क़ुरआन के अहकाम ईमान वालों के दिलों को तसल्ली देते हैं और नासिख़ व मंसूख़ की हिकमतों पर ग़ौर करके उनका ईमान और पुख़्ता हो जाता है।
क़ुरआन-ए-पाक एक ही है, मगर मोमिनों के लिए हिदायत व रहमत बनता है और हठधर्म काफ़िरों के लिए ख़सारा और गुमराही बढ़ाता है।
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