कुरान - 16:104 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

104
إِنَّ ٱلَّذِينَ لَا يُؤۡمِنُونَ بِـَٔايَٰتِ ٱللَّهِ لَا يَهۡدِيهِمُ ٱللَّهُ وَلَهُمۡ عَذَابٌ أَلِيمٌ

Transliteration: (Innal lazeena laa yu'minoona bi Aayaatil laahi laa yahdehimul laahu wa lahum 'azaabun aleem)

बेशक जो लोग अल्लाह की आयतों पर ईमान नहीं लाते, अल्लाह उन्हें हिदायत नहीं देता [237], और उनके लिए दर्दनाक अज़ाब है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 104 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 104 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"बेशक जो लोग अल्लाह की आयतों पर ईमान नहीं लाते, अल्लाह उन्हें हिदायत नहीं देता [237], और उनके लिए दर्दनाक अज़ाब है।"

[237] हठधर्मी हिदायत से महरूमी का सबब

अल्लाह की आयतों को जानबूझकर झुठलाने और कुफ़्र पर अड़ जाने वालों से अल्लाह तआला हिदायत की तौफ़ीक़ छीन लेता है, और वे आख़िरत के दर्दनाक अज़ाब के हक़दार बन जाते हैं।

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