कुरान - 16:105 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

105
إِنَّمَا يَفۡتَرِي ٱلۡكَذِبَ ٱلَّذِينَ لَا يُؤۡمِنُونَ بِـَٔايَٰتِ ٱللَّهِۖ وَأُوْلَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلۡكَٰذِبُونَ

Transliteration: (Innamaa yaftaril kazibal lazeena laa yu'minoona bi Aayaatil laahi wa ulaaa'ika humul kaaziboon)

झूठ बोहतान तो वही बाँधते हैं जो अल्लाह की आयतों पर ईमान नहीं रखते, और वही झूठे हैं [238]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 105 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 105 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"झूठ बोहतान तो वही बाँधते हैं जो अल्लाह की आयतों पर ईमान नहीं रखते, और वही झूठे हैं [238]।"

[238] झूठ कबीरा गुनाह और अम्बिया की पाकीज़गी

झूठ बोलना कबीरा गुनाह और बे-ईमानी की अलामत है। तमाम अम्बिया किराम मासूम हैं और झूठ से पूरी तरह पाक हैं; उनकी ज़बान-ए-मुबारक से कभी कोई झूठी बात नहीं निकल सकती।

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