कुरान - 16:107 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

107
ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمُ ٱسۡتَحَبُّواْ ٱلۡحَيَوٰةَ ٱلدُّنۡيَا عَلَى ٱلۡأٓخِرَةِ وَأَنَّ ٱللَّهَ لَا يَهۡدِي ٱلۡقَوۡمَ ٱلۡكَٰفِرِينَ

Transliteration: (Zaalika bi annahumus tahabbul hayaatad dunyaa 'alal Aakhirati wa annal laaha laa yahdil qawmal kaafireen)

यह इसलिए कि उन्होंने दुनिया की ज़िन्दगी को आख़िरत पर तरजीह दी (पसन्द किया) [242], और इसलिए कि अल्लाह काफ़िरों को राह नहीं दिखाता [243]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 107 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 107 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"यह इसलिए कि उन्होंने दुनिया की ज़िन्दगी को आख़िरत पर तरजीह दी [242], और इसलिए कि अल्लाह काफ़िरों को राह नहीं दिखाता [243]।"

[242] दुनिया की ख़ातिर दीन बेचना

मोमिन दुनिया की ज़िन्दगी को आख़िरत की खेती बनाकर इस्तेमाल करता है; जबकि काफ़िर दुनिया की चमक-दमक के पीछे पड़कर आख़िरत को भुला देता है।

[243] कुफ़्र पर जमने वालों की महरूमी

जो अपने इख़्तियार से कुफ़्र पर डटा रहे और जिसकी मौत कुफ़्र पर तय हो, वह हिदायत से महरूम रहता है।

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