कुरान - 16:119 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

119
ثُمَّ إِنَّ رَبَّكَ لِلَّذِينَ عَمِلُواْ ٱلسُّوٓءَ بِجَهَٰلَةٖ ثُمَّ تَابُواْ مِنۢ بَعۡدِ ذَٰلِكَ وَأَصۡلَحُوٓاْ إِنَّ رَبَّكَ مِنۢ بَعۡدِهَا لَغَفُورٞ رَّحِيمٌ

Transliteration: (Summma inna Rabbaka lillazeena 'amilus sooo'a bijahaalatin summa taaboo mim ba'di zaaalika wa aslahoo inna Rabbaka mim ba'dihaa la Ghafoorur Raheem (section 15))

फिर बेशक आपका रब उनके लिए जिन्होंने नादानी से बुराई की [264], फिर उसके बाद तौबा की और अपने आपको सँवार लिया [265]; बेशक आपका रब इसके बाद ज़रूर बख़्शने वाला मेहरबान है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 119 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 119 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"फिर बेशक आपका रब उनके लिए जिन्होंने नादानी से बुराई की [264], फिर उसके बाद तौबा की और अपने आपको सँवार लिया [265]..."

[264] नादानी और ग़फ़लत में गुनाह

जो इन्सान जज़्बात या नादानी में गुनाह कर बैठे, मगर हराम को हलाल न समझे, उसके लिए तौबा का दरवाज़ा खुला है।

[265] सच्ची तौबा और इस्लाह

तौबा सिर्फ़ ज़बानी तौबा-तौबा कहने का नाम नहीं, बल्कि गुनाह पर शर्मिंदगी, उसे फ़ौरन छोड़ देना और आइन्दा नेक आमाल करके अपनी इस्लाह करना सच्ची तौबा है।

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