Transliteration: (Inna Ibraaheema kaana ummatan qaanital lillaahi Haneefanw wa lam yakuminal mushrikeen)
"बेशक इब्राहीम एक इमाम थे [266], अल्लाह के फ़रमाँबरदार, हर बातिल से जुदा [267], और मुशरिक न थे [268]।"
हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम तौहीद के अज़ीम पेशवा और मुअल्लिम थे; उस दौर में जब सारी दुनिया शिर्क में मुब्तला थी, आप अकेले ही तौहीद की पूरी उम्मत और अंजुमन थे।
जैसे ख़ालिस सोना वही है जिसमें कोई खोट न हो, वैसे ही मोमिन का ईमान हर बातिल अक़ीदे और शिर्क से ख़ालिस होना चाहिए।
हज़रत इब्राहीम ने एक लम्हे के लिए भी कभी शिर्क नहीं किया। जब आपने सितारे, चाँद और सूरज को देखकर 'यह मेरा रब है' फ़रमाया था, तो वह मुशरिकों पर हुज्जत क़ायम करने के लिए था, अक़ीदे के तौर पर नहीं।
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