कुरान - 16:120 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

120
إِنَّ إِبۡرَٰهِيمَ كَانَ أُمَّةٗ قَانِتٗا لِّلَّهِ حَنِيفٗا وَلَمۡ يَكُ مِنَ ٱلۡمُشۡرِكِينَ

Transliteration: (Inna Ibraaheema kaana ummatan qaanital lillaahi Haneefanw wa lam yakuminal mushrikeen)

बेशक इब्राहीम एक इमाम (राहनुमा) थे [266], अल्लाह के फ़रमाँबरदार, हर बातिल से जुदा [267], और मुशरिक न थे [268]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 120 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 120 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"बेशक इब्राहीम एक इमाम थे [266], अल्लाह के फ़रमाँबरदार, हर बातिल से जुदा [267], और मुशरिक न थे [268]।"

[266] हज़रत इब्राहीम की पेशवाई व इमामत

हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम तौहीद के अज़ीम पेशवा और मुअल्लिम थे; उस दौर में जब सारी दुनिया शिर्क में मुब्तला थी, आप अकेले ही तौहीद की पूरी उम्मत और अंजुमन थे।

[267] 'हनीफ़' (हर बातिल से कटकर ख़ालिस होना)

जैसे ख़ालिस सोना वही है जिसमें कोई खोट न हो, वैसे ही मोमिन का ईमान हर बातिल अक़ीदे और शिर्क से ख़ालिस होना चाहिए।

[268] हज़रत इब्राहीम का शिर्क से मुकम्मल पाकीज़ा होना

हज़रत इब्राहीम ने एक लम्हे के लिए भी कभी शिर्क नहीं किया। जब आपने सितारे, चाँद और सूरज को देखकर 'यह मेरा रब है' फ़रमाया था, तो वह मुशरिकों पर हुज्जत क़ायम करने के लिए था, अक़ीदे के तौर पर नहीं।

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