Transliteration: (Summma awhainaa ilaika anit tabi' Millata Ibraaheema haneefaa; wa maa kaana minal mushrikeen)
"फिर हमने आपकी तरफ़ वही भेजी कि 'इब्राहीम के दीन की पैरवी कीजिए [273], जो हर बातिल से जुदा थे और मुशरिक न थे [274]।'"
यहाँ पैरवी से मुराद मातहती नहीं बल्कि दीन-ए-हक़ की मुवाफ़िक़त है। यानी हुज़ूर अकरम ﷺ का दीन ख़ालिस हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की मिल्लत-ए-तौहीद की मुकम्मल तस्दीक़ और उसका कामिल तरीक़ा है।
अल्लाह तआला ने हज़रत इब्राहीम की नसल से हुज़ूर अकरम ﷺ को मबऊ़स फ़रमाकर उनके दीन-ए-तौहीद को ज़िंदा फ़रमाया। हुज़ूर ﷺ एलान-ए-नुबुव्वत से पहले भी मिल्लत-ए-इब्राहीमी पर क़ायम रहकर तमाम बुराइयों से पाक रहे।
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