कुरान - 16:123 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

123
ثُمَّ أَوۡحَيۡنَآ إِلَيۡكَ أَنِ ٱتَّبِعۡ مِلَّةَ إِبۡرَٰهِيمَ حَنِيفٗاۖ وَمَا كَانَ مِنَ ٱلۡمُشۡرِكِينَ

Transliteration: (Summma awhainaa ilaika anit tabi' Millata Ibraaheema haneefaa; wa maa kaana minal mushrikeen)

फिर हमने आपकी तरफ़ वही भेजी कि "इब्राहीम के दीन की पैरवी कीजिए [273], जो हर बातिल से जुदा थे और मुशरिक न थे [274]।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 123 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 123 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"फिर हमने आपकी तरफ़ वही भेजी कि 'इब्राहीम के दीन की पैरवी कीजिए [273], जो हर बातिल से जुदा थे और मुशरिक न थे [274]।'"

[273] 'पैरवी' से मुराद मुवाफ़िक़त व तस्दीक़

यहाँ पैरवी से मुराद मातहती नहीं बल्कि दीन-ए-हक़ की मुवाफ़िक़त है। यानी हुज़ूर अकरम ﷺ का दीन ख़ालिस हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की मिल्लत-ए-तौहीद की मुकम्मल तस्दीक़ और उसका कामिल तरीक़ा है।

[274] औलाद-ए-इब्राहीम पर सबसे बड़ा एहसान

अल्लाह तआला ने हज़रत इब्राहीम की नसल से हुज़ूर अकरम ﷺ को मबऊ़स फ़रमाकर उनके दीन-ए-तौहीद को ज़िंदा फ़रमाया। हुज़ूर ﷺ एलान-ए-नुबुव्वत से पहले भी मिल्लत-ए-इब्राहीमी पर क़ायम रहकर तमाम बुराइयों से पाक रहे।

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