कुरान - 16:124 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

124
إِنَّمَا جُعِلَ ٱلسَّبۡتُ عَلَى ٱلَّذِينَ ٱخۡتَلَفُواْ فِيهِۚ وَإِنَّ رَبَّكَ لَيَحۡكُمُ بَيۡنَهُمۡ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِ فِيمَا كَانُواْ فِيهِ يَخۡتَلِفُونَ

Transliteration: (Innnamaa ju'ilas Sabtu 'alal lazeenakhtalafoo feeh; wa inna Rabbaka la yahkumu bainahum Yawmal Qiyaamati feemaa kaanoo feehi yakhtalifoon)

सनीचर (शनिवार) का दिन तो उन्हीं पर मुक़र्रर हुआ था जिन्होंने उसमें इख़्तिलाफ़ किया था [275]। और बेशक आपका रब क़यामत के दिन उनके बीच ज़रूर फ़ैसला फ़रमाएगा उस बात का जिसमें वे झगड़ते थे [276]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 124 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 124 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"सनीचर का दिन तो उन्हीं पर मुक़र्रर हुआ था जिन्होंने उसमें इख़्तिलाफ़ किया था [275]... [276]।"

[275] सब्त (शनिवार) की पाबंदी यहूदियों की ज़िद थी

यहूदियों ने जुमा के मुक़ाबले में ज़िद करके सनीचर का दिन चुना था, इसलिए उन पर पूरे दिन की सख़्त पाबंदियाँ आयद की गईं। इसके बरअक्स मुसलमानों के लिए जुमा का दिन अल्लाह का अतीया है जिसमें सिर्फ़ नमाज़ के वक़्त काम रोकने का हुक्म है।

[276] हज़रत मूसा की नाफ़रमानी और बन्दर बनने का अज़ाब

जब यहूदियों ने सनीचर के दिन मछली का शिकार करके अहद तोड़ा, तो अल्लाह ने उन्हें बन्दर और सूअर की शक्ल में बदल दिया। नबी के हुक्म की ख़िलाफ़वर्जी हलाकत का सबब बनती है और आख़िरत में इसका मुकम्मल फ़ैसला होगा।

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