कुरान - 16:125 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

125
ٱدۡعُ إِلَىٰ سَبِيلِ رَبِّكَ بِٱلۡحِكۡمَةِ وَٱلۡمَوۡعِظَةِ ٱلۡحَسَنَةِۖ وَجَٰدِلۡهُم بِٱلَّتِي هِيَ أَحۡسَنُۚ إِنَّ رَبَّكَ هُوَ أَعۡلَمُ بِمَن ضَلَّ عَن سَبِيلِهِۦ وَهُوَ أَعۡلَمُ بِٱلۡمُهۡتَدِينَ

Transliteration: (Ud'u ilaa sabeeli Rabbika bilhikmati walmaw 'izatil hasanati wa jaadilhum billatee hiya ahsan; inna Rabbaka huwa a'almu biman dalla 'an sabeelihee wa Huwa a'lamu bilmuhtadeen)

अपने रब की राह की तरफ़ बुलाइए [277] हिकमत और अच्छी नसीहत के साथ [278], और उनसे उस तरीक़े से बहस कीजिए जो सबसे बेहतर हो [279]। बेशक आपका रब ख़ूब जानता है जो उसकी राह से भटका [280], और वह हिदायत पाने वालों को भी ख़ूब जानता है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 125 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 125 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"अपने रब की राह की तरफ़ बुलाइए [277] हिकमत और अच्छी नसीहत के साथ [278], और उनसे उस तरीक़े से बहस कीजिए जो सबसे बेहतर हो [279]... [280]।"

[277] दावत-ए-दीन का आफ़ाक़ी हुक्म

हुज़ूर अकरम ﷺ और आपके बाद उलमा-ए-इस्लाम को हुक्म है कि तमाम मख़्लूक़ को इस्लाम की तरफ़ बुलाएँ। अल्लाह के नज़दीक सिर्फ़ इस्लाम ही सच्चा दीन है।

[278] हिकमत और मौइज़त-ए-हसना

दावत में मुख़ातब की अक़्ल व फ़हम के मुताबिक़ दलीलें देना, पिछली क़ौमों के वाक़िआत से नसीहत करना और दिल छू लेने वाले अल्फ़ाज़ इस्तेमाल करना 'हिकमत' है।

[279] बेहतरीन तरीक़े पर मुनाज़रा

बहस व मुनाज़रे में बद-कलामी और गाली-गलौज के बजाय शाइस्तगी, नर्मी और मज़बूत दलीलों का तरीक़ा अपनाना चाहिए ताकि मक़सद फ़साद के बजाय हिदायत हो।

[280] हिदायत अल्लाह के इख़्तियार में

बन्दे का काम सिर्फ़ दावत पहुँचाना है; हिदायत देना अल्लाह का काम है जो दिलों के अहवाल को ख़ूब जानता है।

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