कुरान - 16:127 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

127
وَٱصۡبِرۡ وَمَا صَبۡرُكَ إِلَّا بِٱللَّهِۚ وَلَا تَحۡزَنۡ عَلَيۡهِمۡ وَلَا تَكُ فِي ضَيۡقٖ مِّمَّا يَمۡكُرُونَ

Transliteration: (Wasbir wa maa sabruka illaa billaah; wa laa tahzan 'alaihim wa laa taku fee daiqim mimmaa yamkuroon)

और (ऐ महबूब!) आप सब्र कीजिए और आपका सब्र अल्लाह ही की तौफ़ीक़ से है। और उन पर ग़म न खाइए और उनके फ़रेब (साज़िशों) से दिल तंग न कीजिए [283]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 127 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 127 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"और आप सब्र कीजिए और आपका सब्र अल्लाह ही की तौफ़ीक़ से है। और उन पर ग़म न खाइए और उनके फ़रेब से दिल तंग न कीजिए [283]।"

[283] सब्र के लिए अल्लाह की मदद

दुश्मनों की अज़ीयतों पर सब्र करना सिर्फ़ अल्लाह की अता की हुई ताक़त और तौफ़ीक़ से मुमकिन है। अल्लाह ने अपने महबूब ﷺ को तसल्ली दी कि दुश्मनों की साज़िशों से दिल छोटा न करें, अल्लाह ने हमेशा अपने नबियों की हिफ़ाज़त फ़रमाई है और अंततः आप ही को ग़लबा अता फ़रमाएगा।

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