Transliteration: (In tahris 'alaa hudaahum fa innal laaha laa yahdee mai yudillu wa maa lahum min naasireen)
"अगर आप उनकी हिदायत के हरीस हैं [81], तो बेशक अल्लाह उसे हिदायत नहीं देता जिसे भटका दे [82], और उनका कोई मददगार नहीं [83]।"
हुज़ूर अकरम ﷺ उम्मत की हिदायत के लिए दिन-रात तड़पते थे। इस आयत में आप ﷺ की इसी बेपनाह शफ़क़त व रहमतुल-लिल-आलमीन की शान का इज़हार है कि अल्लाह ने अपने हबीब के इस दिली सोज़ को क़ुरआन में ज़िक्र फ़रमाया।
काफ़िर अपने इख़्तियार से कुफ़्र चुनते हैं और अल्लाह के इल्म में उनका कुफ़्र पहले से मौजूद है; अल्लाह ने उन्हें ज़बरदस्ती मजबूर नहीं किया।
काफ़िरों का कोई मददगार न दुनिया में होगा न आख़िरत में; जबकि मोमिनों की मदद अल्लाह, उसके फ़रिश्ते और रसूलुल्लाह ﷺ फ़रमाते हैं।
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