कुरान - 16:37 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

37
إِن تَحۡرِصۡ عَلَىٰ هُدَىٰهُمۡ فَإِنَّ ٱللَّهَ لَا يَهۡدِي مَن يُضِلُّۖ وَمَا لَهُم مِّن نَّـٰصِرِينَ

Transliteration: (In tahris 'alaa hudaahum fa innal laaha laa yahdee mai yudillu wa maa lahum min naasireen)

अगर आप उनकी हिदायत के हरीस (आरज़ू-मन्द) हैं [81], तो बेशक अल्लाह उसे हिदायत नहीं देता जिसे भटका दे [82], और उनका कोई मददगार नहीं [83]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 37 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 37 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"अगर आप उनकी हिदायत के हरीस हैं [81], तो बेशक अल्लाह उसे हिदायत नहीं देता जिसे भटका दे [82], और उनका कोई मददगार नहीं [83]।"

[81] हुज़ूर अकरम ﷺ की शफ़क़त और रहमत

हुज़ूर अकरम ﷺ उम्मत की हिदायत के लिए दिन-रात तड़पते थे। इस आयत में आप ﷺ की इसी बेपनाह शफ़क़त व रहमतुल-लिल-आलमीन की शान का इज़हार है कि अल्लाह ने अपने हबीब के इस दिली सोज़ को क़ुरआन में ज़िक्र फ़रमाया।

[82] इन्सानी इख़्तियार और इल्म-ए-इलाही

काफ़िर अपने इख़्तियार से कुफ़्र चुनते हैं और अल्लाह के इल्म में उनका कुफ़्र पहले से मौजूद है; अल्लाह ने उन्हें ज़बरदस्ती मजबूर नहीं किया।

[83] मुनकिरीन की बे-यारो-मददगारी

काफ़िरों का कोई मददगार न दुनिया में होगा न आख़िरत में; जबकि मोमिनों की मदद अल्लाह, उसके फ़रिश्ते और रसूलुल्लाह ﷺ फ़रमाते हैं।

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