कुरान - 16:38 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

38
وَأَقۡسَمُواْ بِٱللَّهِ جَهۡدَ أَيۡمَٰنِهِمۡ لَا يَبۡعَثُ ٱللَّهُ مَن يَمُوتُۚ بَلَىٰ وَعۡدًا عَلَيۡهِ حَقّٗا وَلَٰكِنَّ أَكۡثَرَ ٱلنَّاسِ لَا يَعۡلَمُونَ

Transliteration: (Wa aqsamoo billaahi jahda aimaanihim laa yab'asul laahu mai yamoot; balaa wa'dan 'alaihi haqqanw wa laakinna aksaran naasi laa ya'lamoon)

और उन्होंने अल्लाह की क़सम खाई अपने हलफ़ में पूरी कोशिश से कि "अल्लाह मुर्दों को न उठाएगा।" हाँ क्यों नहीं! [84] यह उसके ज़िम्मे सच्चा वादा है, मगर अक्सर लोग नहीं जानते। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 38 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 38 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"और उन्होंने अल्लाह की क़सम खाई... 'अल्लाह मुर्दों को न उठाएगा।' हाँ क्यों नहीं! [84] यह उसके ज़िम्मे सच्चा वादा है..."

[84] बअस बाद अल-मौत (पुनरुत्थान) का अटल वादा

अल्लाह तआला ने दोबारा ज़िंदा करने के वादे को अपने ज़िम्मे लाज़िम फ़रमाया है। कोई अल्लाह पर जबर नहीं कर सकता, मगर यह उसके अपने अद्ल, हिकमत और करम का तक़ाज़ा है कि वह मुर्दों को दोबारा ज़िंदा फ़रमाकर इन्साफ़ क़ायम करे।

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