कुरान - 16:39 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

39
لِيُبَيِّنَ لَهُمُ ٱلَّذِي يَخۡتَلِفُونَ فِيهِ وَلِيَعۡلَمَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوٓاْ أَنَّهُمۡ كَانُواْ كَٰذِبِينَ

Transliteration: (Liyubaiyina lahumul lazee yakhtalifoona feehi wa liya'lamal lazeena kafarooo annahum kaanoo kaazibeen)

ताकि वह उन पर साफ़ कर दे जिसमें वे झगड़ते थे, और ताकि काफ़िर जान लें कि वे झूठे थे [85]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 39 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 39 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"ताकि वह उन पर साफ़ कर दे जिसमें वे झगड़ते थे, और ताकि काफ़िर जान लें कि वे झूठे थे [85]।"

[85] क़यामत का मक़सद: अम्बिया की सच्चाई और अज़मत का इज़हार

क़यामत क़ायम करने का अस्ल मक़सद मख़्लूक़ पर अम्बिया किराम की सच्चाई और उनकी अज़मत को ज़ाहिर करना है। हिसाब-किताब तो थोड़ी मुद्दत में पूरा हो जाएगा; पचास हज़ार साल के उस तवील दिन का बाक़ी वक़्त हुज़ूर अकरम ﷺ की हक़्क़ानियत, काफ़िरों की रुसवाई और मोमिनीन की इज़्ज़त अफ़ज़ाई के लिए मख़्सूस होगा।

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