Transliteration: (Wallazeena haajaroo fil laahi mim ba'di maa zulimoo lanubawwi' annahum fiddunyaa hasanatanw wa la ajrul Aakhirati akbar; law kaanoo ya'lamoon)
"और जिन्होंने अल्लाह की राह में अपने घर-बार छोड़े इसके बाद कि उन पर ज़ुल्म हुआ था [87], हम ज़रूर उन्हें दुनिया में अच्छा ठिकाना देंगे [88]; और बेशक आख़िरत का सवाब बहुत बड़ा है [89], क्या ही अच्छा होता अगर वे जानते!"
यह आयत उन सहाबा-ए-किराम (मुहाजिरीन) के हक़ में नाज़िल हुई जिन्होंने मक्का के मुशरिकों के ज़ुल्म के सबब पहले हबशा और फिर मदीना मुनव्वरा की तरफ़ हिजरत की। जो हिजरत दुनियावी मक़ासिद के लिए नहीं बल्कि ख़ालिस अल्लाह की रिज़ा के लिए हो, वह अज़ीम इबादत है।
अच्छे ठिकाने से मुराद मदीना मुनव्वरा है जहाँ अल्लाह ने मुहाजिरीन को इज़्ज़त, हुकूमत और सुकून अता फ़रमाया। इमाम मालिक के नज़दीक हुज़ूर अकरम ﷺ की मुबारक आमद के बाद मदीना मुनव्वरा मक्का मुअज़्ज़मा से भी अफ़ज़ल हो गया, क्योंकि अफ़ज़लियत महबूब-ए-ख़ुदा ﷺ के क़दमों की बरकत से है।
मुहाजिरीन को दुनिया में मदीना मुनव्वरा की जो राहतें मिलीं, उनसे उनके आख़िरत के सवाब में कोई कमी नहीं होगी; आख़िरत का अजर और दर्जा बहुत ही बड़ा है।
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