कुरान - 16:43 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

43
وَمَآ أَرۡسَلۡنَا مِن قَبۡلِكَ إِلَّا رِجَالٗا نُّوحِيٓ إِلَيۡهِمۡۖ فَسۡـَٔلُوٓاْ أَهۡلَ ٱلذِّكۡرِ إِن كُنتُمۡ لَا تَعۡلَمُونَ

Transliteration: (Wa maaa arsalnaa min qablika illaa rijaalan nooheee ilaihim; fas'alooo ahlaz zikri in kuntum laa ta'lamoon)

और हमने आपसे पहले न भेजे मगर मर्द [91] जिनकी तरफ़ हम वही फ़रमाते थे; तो ऐ लोगो! इल्म वालों से पूछो अगर तुम्हें इल्म न हो [92]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 43 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 43 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"और हमने आपसे पहले न भेजे मगर मर्द [91] जिनकी तरफ़ हम वही फ़रमाते थे; तो ऐ लोगो! इल्म वालों से पूछो अगर तुम्हें इल्म न हो [92]।"

[91] सिर्फ़ बालिग़ मर्द ही नबी बनाए गए

तमाम अम्बिया किराम सिर्फ़ बालिग़ मर्द ही हुए हैं। इन्सानों के सिवा किसी दूसरी मख़लूक़ को नुबुव्वत नहीं दी गई, और न ही कोई औरत नबी बनाई गई; इसी तरह नाबालिग़ बच्चे या मजनून को नुबुव्वत का मन्सब नहीं दिया जाता।

[92] तक़लीद का शरई सुबूत

यह आयत तक़लीद की बहुत बड़ी दलील है: जो ख़ुद मुजतहिद न हो, उसके लिए लाज़िम है कि वह इल्म वालों (मुजतहिद इमामों) से मसले पूछे और उनकी पैरवी करे। बे-इल्म का साहिब-ए-इल्म से पूछना ही शरीअत में तक़लीद कहलाता है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now