कुरान - 16:44 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

44
بِٱلۡبَيِّنَٰتِ وَٱلزُّبُرِۗ وَأَنزَلۡنَآ إِلَيۡكَ ٱلذِّكۡرَ لِتُبَيِّنَ لِلنَّاسِ مَا نُزِّلَ إِلَيۡهِمۡ وَلَعَلَّهُمۡ يَتَفَكَّرُونَ

Transliteration: (Bilbaiyinaati waz Zubur; wa anzalnaaa ilaikaz Zikra litubaiyina linnaasi maa nuzzila ilaihim wa la'allahum yatafakkaroon)

रौशन निशानियों और किताबों के साथ [93]; और हमने आपकी तरफ़ यह 'ज़िक्र' (क़ुरआन) उतारा [94] ताकि आप लोगों के सामने उसे बयान फ़रमा दें जो उनकी तरफ़ नाज़िल हुआ और ताकि वे ग़ौर करें। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 44 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 44 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"रौशन निशानियों और किताबों के साथ [93]; और हमने आपकी तरफ़ यह 'ज़िक्र' उतारा [94] ताकि आप लोगों के सामने उसे बयान फ़रमा दें..."

[93] मोजिज़ात और आसमानी किताबें

रौशन निशानियों से मुराद मोजिज़ात हैं और किताबों से मुराद सहीफ़े व आसमानी किताबें। अल्लाह तआला ने हर नबी को मोजिज़े अता फ़रमाए और कोई नबी मोजिज़े या किताब व सहीफ़े के बिना तशरीफ़ नहीं लाया।

[94] क़ुरआन 'ज़िक्र' है और हुज़ूर ﷺ का बयान

क़ुरआन-ए-पाक का एक नाम 'ज़िक्र' है क्योंकि यह मोमिनों के लिए इज़्ज़त व नसीहत और नबी करीम ﷺ का ज़िक्र-ए-जमील है। नबी करीम ﷺ ने क़ुरआन के हर हुक्म को पूरी तरह बयान फ़रमाया और कुछ भी नहीं छुपाया। इसके अलावा क़ुरआन के मआनी में तदब्बुर व तफ़क्कुर करना अफ़ज़ल तरीन इबादत है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now