Transliteration: (Bilbaiyinaati waz Zubur; wa anzalnaaa ilaikaz Zikra litubaiyina linnaasi maa nuzzila ilaihim wa la'allahum yatafakkaroon)
"रौशन निशानियों और किताबों के साथ [93]; और हमने आपकी तरफ़ यह 'ज़िक्र' उतारा [94] ताकि आप लोगों के सामने उसे बयान फ़रमा दें..."
रौशन निशानियों से मुराद मोजिज़ात हैं और किताबों से मुराद सहीफ़े व आसमानी किताबें। अल्लाह तआला ने हर नबी को मोजिज़े अता फ़रमाए और कोई नबी मोजिज़े या किताब व सहीफ़े के बिना तशरीफ़ नहीं लाया।
क़ुरआन-ए-पाक का एक नाम 'ज़िक्र' है क्योंकि यह मोमिनों के लिए इज़्ज़त व नसीहत और नबी करीम ﷺ का ज़िक्र-ए-जमील है। नबी करीम ﷺ ने क़ुरआन के हर हुक्म को पूरी तरह बयान फ़रमाया और कुछ भी नहीं छुपाया। इसके अलावा क़ुरआन के मआनी में तदब्बुर व तफ़क्कुर करना अफ़ज़ल तरीन इबादत है।
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