Transliteration: (Afa aminal lazeena makarus saiyi aati ai yakhsifal laahu bihimul arda aw yaaa tiyahumul 'azaabu min haisu laa yash'uroon)
"तो क्या वे लोग जो बुरी साज़िशें करते हैं [95] इस बात से बे-ख़ौफ़ हो गए हैं कि अल्लाह उन्हें ज़मीन में धँसा दे [96], या उन पर वहाँ से अज़ाब आ जाए जहाँ का उन्हें गुमान भी न हो?"
काफ़िर छिपकर नबी करीम ﷺ और सहाबा-ए-किराम को नुक़सान पहुँचाने की साज़िशें रचते थे; मगर अल्लाह उनके हर फ़रेब से बाख़बर है।
अल्लाह तआला ज़ालिमों को ज़मीन में धँसाने पर क़ादिर है। हुज़ूर अकरम ﷺ की मुबारक आमद के सबब पिछली क़ौमों जैसी आम हलाकत तो रोक दी गई, मगर ख़ास मुजरिमों पर आज भी अचानक अज़ाब आ सकता है।
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