कुरान - 16:45 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

45
أَفَأَمِنَ ٱلَّذِينَ مَكَرُواْ ٱلسَّيِّـَٔاتِ أَن يَخۡسِفَ ٱللَّهُ بِهِمُ ٱلۡأَرۡضَ أَوۡ يَأۡتِيَهُمُ ٱلۡعَذَابُ مِنۡ حَيۡثُ لَا يَشۡعُرُونَ

Transliteration: (Afa aminal lazeena makarus saiyi aati ai yakhsifal laahu bihimul arda aw yaaa tiyahumul 'azaabu min haisu laa yash'uroon)

तो क्या वे लोग जो बुरी साज़िशें करते हैं [95] इस बात से बे-ख़ौफ़ हो गए हैं कि अल्लाह उन्हें ज़मीन में धँसा दे [96], या उन पर वहाँ से अज़ाब आ जाए जहाँ का उन्हें गुमान भी न हो? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 45 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 45 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"तो क्या वे लोग जो बुरी साज़िशें करते हैं [95] इस बात से बे-ख़ौफ़ हो गए हैं कि अल्लाह उन्हें ज़मीन में धँसा दे [96], या उन पर वहाँ से अज़ाब आ जाए जहाँ का उन्हें गुमान भी न हो?"

[95] हुज़ूर ﷺ और सहाबा के ख़िलाफ़ गुप्त साज़िशें

काफ़िर छिपकर नबी करीम ﷺ और सहाबा-ए-किराम को नुक़सान पहुँचाने की साज़िशें रचते थे; मगर अल्लाह उनके हर फ़रेब से बाख़बर है।

[96] अचानक ग़ैबी अज़ाब की चेतावनी

अल्लाह तआला ज़ालिमों को ज़मीन में धँसाने पर क़ादिर है। हुज़ूर अकरम ﷺ की मुबारक आमद के सबब पिछली क़ौमों जैसी आम हलाकत तो रोक दी गई, मगर ख़ास मुजरिमों पर आज भी अचानक अज़ाब आ सकता है।

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