कुरान - 16:47 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

47
أَوۡ يَأۡخُذَهُمۡ عَلَىٰ تَخَوُّفٖ فَإِنَّ رَبَّكُمۡ لَرَءُوفٞ رَّحِيمٌ

Transliteration: (Aw yaakhuzahum 'alaa takhawwuf; fa inna Rabbakum la Ra'oofur Raheem)

या उन्हें डरा-धमका कर (घटा-घटा कर) आहिस्ता-आहिस्ता पकड़ ले [98]। बेशक तुम्हारा रब निहायत शफ़ीक़ मेहरबान है [99]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 47 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 47 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"या उन्हें डरा-धमका कर आहिस्ता-आहिस्ता पकड़ ले [98]। बेशक तुम्हारा रब निहायत शफ़ीक़ मेहरबान है [99]।"

[98] अज़ाब की चार क़िस्में

यहाँ अज़ाब की चार सूरतों का बयान हुआ: (1) ज़मीन में धँसना, (2) क़ारून की तरह ज़िंदा हलाक होना, (3) सफ़र में अचानक पकड़, और (4) आहिस्ता-आहिस्ता अलामात के ज़रिए तबाही।

[99] अज़ाब में ताख़ीर अल्लाह की शफ़क़त

अल्लाह तआला फ़ौरन अज़ाब नहीं भेजता बल्कि तौबा की मोहलत देता है, क्योंकि वह 'रऊफ़ व रहीम' है; मगर जब उसकी पकड़ आती है तो फिर कोई बच नहीं सकता।

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