Transliteration: (Aw yaakhuzahum 'alaa takhawwuf; fa inna Rabbakum la Ra'oofur Raheem)
"या उन्हें डरा-धमका कर आहिस्ता-आहिस्ता पकड़ ले [98]। बेशक तुम्हारा रब निहायत शफ़ीक़ मेहरबान है [99]।"
यहाँ अज़ाब की चार सूरतों का बयान हुआ: (1) ज़मीन में धँसना, (2) क़ारून की तरह ज़िंदा हलाक होना, (3) सफ़र में अचानक पकड़, और (4) आहिस्ता-आहिस्ता अलामात के ज़रिए तबाही।
अल्लाह तआला फ़ौरन अज़ाब नहीं भेजता बल्कि तौबा की मोहलत देता है, क्योंकि वह 'रऊफ़ व रहीम' है; मगर जब उसकी पकड़ आती है तो फिर कोई बच नहीं सकता।
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