कुरान - 16:49 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

49
وَلِلَّهِۤ يَسۡجُدُۤ مَا فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِي ٱلۡأَرۡضِ مِن دَآبَّةٖ وَٱلۡمَلَـٰٓئِكَةُ وَهُمۡ لَا يَسۡتَكۡبِرُونَ

Transliteration: (Wa lillaahi yasjudu maa fis samaawaati wa maa fil ardi min daaabbatinw walma laaa'ikatu wa hum laa yastakbiroon)

और अल्लाह ही को सजदा करते हैं जो कुछ आसमानों में हैं और जो कुछ ज़मीन में हैं, सब जानदार और फ़रिश्ते, और वे घमंड नहीं करते [103]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 49 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 49 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"और अल्लाह ही को सजदा करते हैं जो कुछ आसमानों में हैं और जो कुछ ज़मीन में हैं, सब जानदार और फ़रिश्ते, और वे घमंड नहीं करते [103]।"

[103] मख़्लूक़ात की फ़रमाँबरदारी और फ़रिश्तों का मर्तबा

इन्सानों और जिन्नों के सिवा कायनात की कोई मख़्लूक़ काफ़िर या मुशरिक नहीं है; सब अल्लाह के हुक्म के ताबे हैं। इन्सान के बाद फ़रिश्ते अल्लाह की सबसे मुअज़्ज़म मख़्लूक़ हैं जो बिना किसी तकब्बुर के हर पल अल्लाह के आगे सजदा-रेज़ रहते हैं।

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