कुरान - 16:51 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

51
۞وَقَالَ ٱللَّهُ لَا تَتَّخِذُوٓاْ إِلَٰهَيۡنِ ٱثۡنَيۡنِۖ إِنَّمَا هُوَ إِلَٰهٞ وَٰحِدٞ فَإِيَّـٰيَ فَٱرۡهَبُونِ

Transliteration: (Wa qaalal laahu laa tatta khizooo ilaahainis naini innamaa Huwa Ilaahunw Waahid; fa iyyaaya farhaboon)

और अल्लाह ने फ़रमाया है [105], "दो माबूद न ठहराओ; वह तो बस एक ही माबूद है। तो मुझी से डरो [106]।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 51 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 51 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"और अल्लाह ने फ़रमाया है [105], 'दो माबूद न ठहराओ; वह तो बस एक ही माबूद है। तो मुझी से डरो [106]।'"

[105] तौहीद का क़तई हुक्म

अल्लाह तआला ने दो माबूद मानने से मना फ़रमाया। जब दो माबूद नहीं हो सकते, तो तीन या सैकड़ों बुतों को माबूद मानना बदर्जा-ए-औला बातिल है। अल्लाह तआला अपनी ज़ात और सिफ़ात में यकता और वाहिद है।

[106] सिर्फ़ अल्लाह का ख़ौफ़

इबादत और ताज़ीम के लिहाज़ से केवल अल्लाह तआला का ख़ौफ़ दिल में होना चाहिए, किसी मख़लूक़ से माबूद समझकर डरना शिर्क है।

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