Transliteration: (Wa qaalal laahu laa tatta khizooo ilaahainis naini innamaa Huwa Ilaahunw Waahid; fa iyyaaya farhaboon)
"और अल्लाह ने फ़रमाया है [105], 'दो माबूद न ठहराओ; वह तो बस एक ही माबूद है। तो मुझी से डरो [106]।'"
अल्लाह तआला ने दो माबूद मानने से मना फ़रमाया। जब दो माबूद नहीं हो सकते, तो तीन या सैकड़ों बुतों को माबूद मानना बदर्जा-ए-औला बातिल है। अल्लाह तआला अपनी ज़ात और सिफ़ात में यकता और वाहिद है।
इबादत और ताज़ीम के लिहाज़ से केवल अल्लाह तआला का ख़ौफ़ दिल में होना चाहिए, किसी मख़लूक़ से माबूद समझकर डरना शिर्क है।
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