कुरान - 16:53 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

53
وَمَا بِكُم مِّن نِّعۡمَةٖ فَمِنَ ٱللَّهِۖ ثُمَّ إِذَا مَسَّكُمُ ٱلضُّرُّ فَإِلَيۡهِ تَجۡـَٔرُونَ

Transliteration: (Wa maa bikum minni'matin faminal laahi summa izaa massakumud durru fa ilaihi taj'aroon)

और जो कोई नेमत तुम्हारे पास है वह सब अल्लाह ही की तरफ़ से है [109]। फिर जब तुम्हें कोई तकलीफ़ पहुँचती है तो उसी की तरफ़ फ़रियाद करते हो। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 53 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 53 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"और जो कोई नेमत तुम्हारे पास है वह सब अल्लाह ही की तरफ़ से है [109]। फिर जब तुम्हें कोई तकलीफ़ पहुँचती है तो उसी की तरफ़ फ़रियाद करते हो।"

[109] तमाम नेमतें अल्लाह की देन

हर नेमत — चाहे बराहे-रास्त मिले (जैसे सूरज की धूप) या अस्बाब के ज़रिए मिले (जैसे चिराग़ की रौशनी) — हक़ीक़त में अल्लाह ही की अता है। जब इन्सान पर कोई सख़्त मुसीबत आती है, तो उसकी फ़ितरत बे-इख़्तियार सिर्फ़ अल्लाह ही के आगे फ़रियाद करती है।

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