Transliteration: (Wa maa bikum minni'matin faminal laahi summa izaa massakumud durru fa ilaihi taj'aroon)
"और जो कोई नेमत तुम्हारे पास है वह सब अल्लाह ही की तरफ़ से है [109]। फिर जब तुम्हें कोई तकलीफ़ पहुँचती है तो उसी की तरफ़ फ़रियाद करते हो।"
हर नेमत — चाहे बराहे-रास्त मिले (जैसे सूरज की धूप) या अस्बाब के ज़रिए मिले (जैसे चिराग़ की रौशनी) — हक़ीक़त में अल्लाह ही की अता है। जब इन्सान पर कोई सख़्त मुसीबत आती है, तो उसकी फ़ितरत बे-इख़्तियार सिर्फ़ अल्लाह ही के आगे फ़रियाद करती है।
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