कुरान - 16:55 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

55
لِيَكۡفُرُواْ بِمَآ ءَاتَيۡنَٰهُمۡۚ فَتَمَتَّعُواْ فَسَوۡفَ تَعۡلَمُونَ

Transliteration: (Liyakfuroo bimaa aatainaahum; fatamatta'oo, fasawfa ta'lamoon)

ताकि हमारी दी हुई नेमतों की ना-शुक्री करें। तो कुछ बरत लो (मज़ा उड़ा लो), अब जल्द जान जाओगे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 55 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 55 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"ताकि हमारी दी हुई नेमतों की ना-शुक्री करें। तो कुछ बरत लो, अब जल्द जान जाओगे।"

अल्लाह की नेमतों का शुक्र अदा करने के बजाय कुफ़्र व शिर्क इख़्तियार करने वालों को चेतावनी दी गई है कि दुनिया की चंद रोज़ा ज़िंदगी में जितना मज़ा उड़ाना है उड़ा लो, बहुत जल्द आख़िरत में अपने इस जुर्म का भयानक अंजाम देख लोगे।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now