कुरान - 16:57 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

57
وَيَجۡعَلُونَ لِلَّهِ ٱلۡبَنَٰتِ سُبۡحَٰنَهُۥ وَلَهُم مَّا يَشۡتَهُونَ

Transliteration: (Wa yaj'aloona lillaahil banaati Subhaanahoo wa lahum maa yashtahoon)

और वे अल्लाह के लिए बेटियाँ ठहराते हैं [114] — पाकी है उसको! — और अपने लिए जो अपनी ख़्वाहिश है [115] (बेटे पसंद करते हैं)। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 57 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 57 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"और वे अल्लाह के लिए बेटियाँ ठहराते हैं [114] — पाकी है उसको! — और अपने लिए जो अपनी ख़्वाहिश है [115]।"

[114] फ़रिश्तों को अल्लाह की बेटियाँ कहना बातिल

क़बीला ख़ोज़ाआ और किनाना के मुशरिक़ीन फ़रिश्तों को अल्लाह की बेटियाँ कहते थे। यह अक़्ल और शरीअत दोनों के ख़िलाफ़ है: औलाद वालिदैन की जिन्स से होती है, और अल्लाह की कोई जिन्स या मिसाल नहीं; फ़रिश्ते अल्लाह के फ़रमाँबरदार बन्दे हैं, औलाद नहीं।

[115] मुशरिकों का दोहरा दोग़लापन

अपने लिए बेटे चाहते हैं जिन्हें इज़्ज़त समझते हैं, और अल्लाह के लिए बेटियाँ ठहराते हैं जिन्हें ख़ुद अपने लिए ज़िल्लत समझते हैं। यह उनकी बद-अख़्लाक़ी और बद-अक़ीदगी का खुला सुबूत है।

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