कुरान - 16:58 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

58
وَإِذَا بُشِّرَ أَحَدُهُم بِٱلۡأُنثَىٰ ظَلَّ وَجۡهُهُۥ مُسۡوَدّٗا وَهُوَ كَظِيمٞ

Transliteration: (Wa izaa bushshira ahaduhum bil unsaa zalla wajhuhoo muswaddanw wa huwa kazeem)

और जब उनमें से किसी को बेटी की ख़ुशख़बरी दी जाए तो दिन भर उसका चेहरा काला रहता है और वह ग़म खाता रहता है [116]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 58 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 58 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"और जब उनमें से किसी को बेटी की ख़ुशख़बरी दी जाए तो दिन भर उसका चेहरा काला रहता है और वह ग़म खाता रहता है [116]।"

[116] बेटी की पैदाइश पर ग़म ज़माना-ए-जाहिलियत की रस्म

बेटी की विलादत पर रंज व ग़म का इज़हार करना कुफ़्र और ज़माना-ए-जाहिलियत का तरीक़ा है जिसकी क़ुरआन ने मज़म्मत फ़रमाई। अलबत्ता दीन की ख़िदमत के मक़सद से नेक बेटे की दुआ करना सुन्नत-ए-अम्बिया है। औलाद अल्लाह की नेमत है और बेटी की पैदाइश पर ख़ुशी मनाना इस्लामी तर्ज़-ए-अमल है।

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