Transliteration: (Wa izaa bushshira ahaduhum bil unsaa zalla wajhuhoo muswaddanw wa huwa kazeem)
"और जब उनमें से किसी को बेटी की ख़ुशख़बरी दी जाए तो दिन भर उसका चेहरा काला रहता है और वह ग़म खाता रहता है [116]।"
बेटी की विलादत पर रंज व ग़म का इज़हार करना कुफ़्र और ज़माना-ए-जाहिलियत का तरीक़ा है जिसकी क़ुरआन ने मज़म्मत फ़रमाई। अलबत्ता दीन की ख़िदमत के मक़सद से नेक बेटे की दुआ करना सुन्नत-ए-अम्बिया है। औलाद अल्लाह की नेमत है और बेटी की पैदाइश पर ख़ुशी मनाना इस्लामी तर्ज़-ए-अमल है।
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